‘‘बीजों से हरियाली‘‘ अभियान के उत्साहजनक परिणाम

  • District : dipr
  • Department :
  • VIP Person :
  • Press Release
  • State News
  • Attached Document :

    LK-28-07-2020-6.docx

Description

‘‘बीजों से हरियाली‘‘ अभियान के उत्साहजनक परिणाम

जयपुर, 28 जुलाई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं राजस्थान वानिकी एवं वन्यजीव प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. एन.सी. जैन  की पहल पर कोरोना दौर में  चलाये गये ’’बीजों से हरियाली अभियान’’ के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।

डॉ. जैन ने बताया कि कोरोना दौर में जब लोग सामाजिक संपर्क से बच रहे हैं, ऎसे में लोगों का सामूहिक रूप से मिलकर पौधारोपण करना कठिन था। इसलिए संस्थान ने बीजों से हरियाली अभियान चलाया, जिसमें एक-दो लोग मिलकर पेड़ों के बीज इकट्ठा करके इन्हें कहीं भी लगा सकते हैं। 

उन्होंने बताया कि इस बार कोरोना के कारण संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं हो पा रहे थे, इसलिए ऑनलाइन वर्कशॉप से पौधारोपण व बीजों से हरियाली को लेकर हजारों लोगों को जागरूक किया गया। विश्व पृथ्वी दिवस तथा पर्यावरण दिवस पर भी आमजन को ऑनलाइन माध्यमों से जागरूक किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि कोरोना दौर में भी आमजन ने अपने आसपास ही बीजों को इकट्ठा करके उन्हें रोपा। इस अभियान में  नेहरू युवा केंद्र के  तत्वावधान में  एवं अन्य कई स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से  5 लाख से अधिक  बीजों का रोपण किया जा चुका है।  इसके अतिरिक्त कई वन अधिकारियों ने भी  नरेगा कार्यक्रम के तहत  सीड बॉल्स बनाकर  बीजारोपण का कार्य व्यापक स्तर पर हाथ में लिया है। 

उन्होंने बताया कि अप्रैल से ही अभियान के तहत आमजन से बीजों को एकत्र करने का आह्वान किया गया था। इसमें आम, जामुन, करौंदा, लसोड़ा जैसे फलदार पौधों के बीज तो घर पर ही जमा किए जा सकते थे। लोगों ने ऎसा किया भी। इसके अलावा हर जगह नीम के पेड़ मिल जाते हैं, इनके नीचे गिरे बीजों को रोपने का आह्वान भी किया गया। एक बारिश का पानी ही रोपे गए बीजों को हरियाली में बदल देता है। 

डॉ. जैन ने बताया कि बीजों से हरियाली अभियान के ऑनलाइन सेशन्स से राज्य ही नहीं देशभर के पर्यावरण प्रेमी जुड़े और बीजों से हरियाली लाने में सहयोगी बने।
यूं होती है बीजों से हरियाली

हम सभी जानते हैं कि प्रकृति में सभी प्रजातियों के पेड़ काफी मात्रा में बीज पैदा करते हैं। यदि उनको उपयुक्त स्थान जैसे थोड़ा ढीली हुई मिट्टी, थोड़ा नमी एवं सुरक्षा मिल जाए तो उनमें से अधिकांश बीज उग जाएंगे। बीजों से हरियाली के अभियान में यही प्रयास किया जाता है कि हम एक छोटा सा नोच बना करके वहां वर्षा के पानी को रोकने का प्रयास करते हैं और उसके नीचे की ओर  वहां की मिट्टी को नरम करके ढेर कर उसमें बीज बोते हैं जिससे बीजों के उगने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही एक बार बीज बोने के बाद हर एक-दो सप्ताह में वहां जाकर उसकी सार संभाल करते हैं और आवश्यक हो तो थोड़ी निराई गुड़ाई कर और पौधे के चारों और मिट्टी को  अच्छी प्रकार से दबा देते हैं जिससे ऎसे   पौधों के बड़े होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
इसके लिए आवश्यक है कि हम स्थानीय परिस्थिति के अनुसार उपयुक्त प्रजातियों का चुनाव करें। यदि स्थानीय परिस्थिति हल्की पहाड़ी अथवा कठोर अथवा पथरीली हो तो बीजारोपण हेतु हैरू  रोंझ, सिरस, नीम, पलाश, अमलतास, चुरैल, बेल आदि के बीजों का उपयोग किया जा सकता है। 

यदि मैदानी और गहरी मिट्टी वाला क्षेत्र हो तो ऎसे स्थानों पर नीम, शीशम, अरड़ू, बबूल, करंज, पलाश, आम, जामुन, लसोड़ा, बरगद, पीपल, गुलमोहर एवं ऎसी प्रजातियों का चुनाव किया जा सकता है।

 यदि क्षेत्र से कोई छोटा मोटा नाला निकलता हो तो उसके आसपास की भूमि में अर्जुन, बहेड़ा, करंज, करौंदा, छोटी जामुन, खजूर, गूलर, लसोड़ा आदि प्रजातियों का उपयोग किया जा सकता है।

राजस्थान राज्य के पश्चिमी भागों में खेजड़ी, रोहिडा, पीलू, बेर,  कुमठा, नीम, अरड़ू आदि प्रजातियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।



Supporting Images